कुछ समाचारिक सूत्रों ने मिस्र के जनांदोलन के विरुद्ध सऊदी अरब और क़तर के षडयंत्रों का रहस्योदघाटन किया है। इन सूत्रों के अनुसार सऊदी अरब के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बंदर बिन सुल्तान और क़तर के प्रधानमंत्री हम्द बिन जासिम उन अरब हस्तियों में से हैं जिन्होंने मिस्र के अंदर उपद्रव करवाने के लिए योजना पेश की है। समाचारिक सूत्रों ने इस बात का रहस्योदघाटन किया है कि इन अधिकारियों ने अभी हाल ही में क़तर की राजधानी दोहा में चार व्यक्तियों पर आधारित अमेरिका के एक प्रतिनिधिमंडल से भेंट की है और इन लोगों ने मिस्र में अशांति उत्पन्न करने के बारे में वार्ता की है। प्राप्त समाचारों के अनुसार मिस्र में पूंजी निवेश बंद करना और मिस्री क्रांति के विरोधी तत्वों का आर्थिक समर्थन, मिस्र विरोधी षडयंत्रों का भाग है। इससे पहले कुछ मिस्री अधिकारियों ने कहा था कि सऊदी अरब ने मिस्र की क्रांति को आघात पहुंचाने के लिए पांच अरब डालर की राशि विशेष की है। मिस्री अधिकारियों ने कहा है कि सऊदी अरब जब हुस्नी मुबारक की सत्ता का अंत और उन पर मुक़द्दमा चलने से रोकने में असफल हो गया तो उसने मिस्र के जनांदोलन को आघात पहुंचाने के उद्देश्य से पांच अरब डालर की राशि विशेष कर दी। वर्तमान समय में कुछ अरब देशों की नीति यह है कि क्षेत्र में मिस्री जनांदोलन की भूमिका व प्रभाव को कम करें। अब यह बात स्पष्ट हो चुकी है कि वर्तमान मिस्र, हुस्नी मुबारक के काल के मिस्र से पूर्णतः भिन्न है क्योंकि उस समय का मिस्र क्षेत्र में अमेरिका और इस्राईल का घटक व मित्र था जबकि वर्तमान समय का मिस्र कुछ और है इसलिए अमेरिका के कुछ घटक मिस्री जनांदोलन का विरोध करने लगे हैं परंतु यह बिन्दु बिल्कुल स्पष्ट है कि मिस्र के लोग सावधान हैं और वे उन ख़तरों के मुक़ाबले में डटे हुए हैं जिनसे उनकी क्रांति को ख़तरा है और मिस्री क्रांति के विरुद्ध षडयंत्र रचने वालों को जान लेना चाहिये कि जिस तरह उन्होंने हुस्नी मुबारक को बचाने के लिए अपना समस्त प्रयास कर लिए परंतु अंत में हुस्नी मुबारक की विदाई हो ही गयी और उन पर मुक़द्दमा चलने से भी वे न रोक सके उसी तरह मिस्री जनांदोलन के विरुद्ध किये जाने वाले उनके दूसरे षडयंत्र भी विफल होकर रहेंगे।(एरिब डाट आई आर के धन्यवाद के साथ).........166